

बलौदाबाजार। नगर की ऐतिहासिक धरोहर और आस्था का केंद्र रामसागर तालाब आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। विडंबना देखिए कि जिस तालाब को शहर की पहचान होना चाहिए था, वह नगर पालिका की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक उदासीनता के कारण गंदगी का डंपिंग यार्ड बनता जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष और पूर्व पार्षद लक्ष्मी साहू ने पार्षदों के साथ मिलकर नगर पालिका अध्यक्ष अशोक जैन और C.M.O. के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
सौंदर्य के पीछे का काला सच: पारदर्शिता पर सवाल
रामसागर तालाब की कहानी अब विकास की नहीं, बल्कि कार्यशैली की पारदर्शिता पर उठते सवालों की कहानी बन गई है। लक्ष्मी साहू ने तीखे तेवरों में नगरपालिका अध्यक्ष अशोक जैन की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लेते हुए पूछा है कि आखिर पूर्व में 2 से 3 बार किए गए सौंदर्यीकरण का पैसा गया कहां?
नाम का विकास: तालाब के चारों ओर पत्थर और लाइटें तो लगीं, लेकिन पानी आज भी जहरीला है।
दिखावे की फाइलें: कागजों पर तालाब चमक रहा है, मगर हकीकत में वहां केवल जलकुंभी और बदबू का साम्राज्य है।
लक्ष्मी साहू का यह आवेदन केवल एक ज्ञापन नहीं, बल्कि नगर पालिका की “अंधेर नगरी” के खिलाफ एक चार्जशीट की तरह है।
मुख्य मांग: “तालाब को नाली मत बनाओ”
ज्ञापन में लक्ष्मी साहू और पार्षदों ने स्पष्ट मांग रखी है कि तालाब को गंदगी से बचाने के लिए तकनीकी सुधार तत्काल किए जाएं। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
स्कून गेट की स्थापना: तालाब से गंदे पानी की निकासी के लिए तत्काल स्कून गेट लगवाया जाए ताकि गंदा पानी वापस तालाब के शुद्ध जल को दूषित न करे।
ह्यूम पाइप का विस्तार: वार्ड नंबर 14 में ह्यूम पाइप को सीधे तालाब से लगे पुलिया से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि जलभराव की समस्या खत्म हो और पानी का प्रवाह सही दिशा में हो।
स्वच्छ जल की आपूर्ति: तालाब में गंदे नालों का पानी गिरने से रोककर उसे स्वच्छ पानी से भरने की योजना पर अमल हो।
आक्रोश: आखिर कब जागेगा प्रशासन?
लक्ष्मी साहू की अभिलाषा और क्रोध इस बात को प्रमाणित करता है कि नगर की जनता अब ‘छलावे वाले विकास’ से तंग आ चुकी है। चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि यदि इस ऐतिहासिक धरोहर के साथ खिलवाड़ बंद नहीं हुआ और ज्ञापन पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन की राह दूर नहीं है।
“नगर पालिका अध्यक्ष और अधिकारियों की सांठगांठ ने एक सांस्कृतिक धरोहर को गंदे नाले में तब्दील कर दिया है। बार-बार सौंदर्यीकरण के नाम पर सरकारी खजाने की बंदरबांट की गई, लेकिन धरातल पर परिणाम शून्य है।”
— लक्ष्मी साहू, अध्यक्ष, चेंबर ऑफ कॉमर्स
निष्कर्ष: जनता की अदालत में अध्यक्ष की कार्यशैली
यह मामला अब केवल एक तालाब की सफाई का नहीं रह गया है, बल्कि यह नगर पालिका प्रशासन की साख का विषय बन गया है। अशोक जैन की कार्यशैली अब जनता के बीच चर्चा का विषय है—क्या वे इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए ठोस कदम उठाएंगे, या रामसागर तालाब इसी तरह भ्रष्टाचार की गंदगी में डूबा रहेगा?
नगरवासियों की नजरें अब C.M.O. और नगर पालिका अध्यक्ष के अगले कदम पर टिकी हैं।





